रविवार, 14 नवंबर 2010

ऐसा भी क्‍या, कि‍ ...

दर्द ऐसा भी क्‍या
कि‍ कहते बने न सहते बने
घर ऐसा भी क्‍या
कि‍ रहते बने न ढहते बने

दरि‍या-दरि‍या, पानी-पानी
कस्‍ती-कस्‍ती मौज रवानी
मगर ऐसा भी क्‍या
कि‍ रूकते बने न बहते बने

मंजि‍ल-मंजि‍ल, रस्‍ता-रस्‍ता
बस्‍ती-बस्‍ती पैर दस्‍ता
पर ऐसा भी क्‍या
कि‍ उड़ते बने न मुड़ते बने

कौन देगा ख़बर हवा बीमार है
बि‍गड़ती तासीर की दवा बीमार है

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