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बुधवार, 11 अप्रैल 2012

फि‍र


थकान के बि‍स्‍तर पर बेसुध नींद 
मूर्छा की हद तक 
कभी-कभी मौत की तरह 
बेहद शांत और थि‍र 
                       फि‍र 
एक चुटकी सुबह की 
और मुसकाती धूप 
            पुचकारती नई लंबी यात्रा के लिए 
                  बहलाती-सी कि‍सी बच्‍चे की तरह 
समझा चुकी होती पूरी तरह एक नया काम 

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